इस लेख में हम औषधीय फसल की खेती की जानकारी देने जा रहे हैं जिसका भाव प्रति क्विंटल 75000 तक मिलता है।
सर्पगंधा का बाजार भाव क्या है
यहां पर जिस औषधीय फसल की खेती की बात की जा रही वह सर्पगंधा है। जिसके बाजार भाव की बात करें तो 75000 प्रति क्विंटल तक किसानों को मिल रहा है। इसकी मांग आयुर्वेदिक कंपनियां में ज्यादा रहती है। जहां पर किसान तगड़ा मुनाफा कमा सकते हैं। इसकी सूखी जड़े किसान बेचते हैं। आईए जानते हैं इसकी खेती कब की जाती है, कैसे की जाती है, कितना समय लगता है, कितना उत्पादन मिलता है।
सर्पगंधा की खेती कब और कैसे होती है
सर्पगंधा फसल की खेती किसान जून से जुलाई के बीच में करते हैं। जिसमें बलुई दोमट और काली मिट्टी अच्छी मानी जाती है। गर्मी में दो से तीन बार गहरी जुताई करने के बाद इस खेत में गोबर की खाद मिलाकर खेत को समतल बनाकर उसकी खेती की जाती है। इसकी खेती बीज से और तनों के टुकड़ों से भी कर सकते हैं। जड़ के टुकड़ों से भी इसकी खेती कर सकते हैं। जिसमें जड़ के टुकड़े 5 सेंटीमीटर हो तो उनकी बुवाई की जाती है।
जिसमें एक बीघा में 2 किलो बीज लगता है। इसकी नर्सरी दो महीने में तैयार हो जाती है। गर्मियों में इसे 20 दिन के अंतराल में पानी दिया जाता है, और सर्दी में 30 से 40 दिन के अंतराल में सिंचाई की जाती है।
सर्पगंधा की खेती में कितना समय लगता है
सर्पगंधा की खेती में किसानों का समय ज्यादा लगता है अन्य फसलों के मुकाबले। जिसमें बताया जाता है कि 18 से 24 महीने में तैयार होती है। अगर किसान 18 महीने में ही निकाल लेते हैं तो फिर उत्पादन कम मिलता है। लेकिन 24 महीने में निकालते हैं तो उत्पादन ज्यादा मिलता है। जिसमें एक बीघा से 18 महीने में 2 क्विंटल और 24 महीने में 5 क्विंटल तक किसानों को इससे मिल जाता है। अगर किसान सही तरीके से इसकी खेती करते हैं बाजार भाव भी अच्छा मिलता है, तो 1 एकड़ 8 से 10 लाख रुपए कमाया जा सकता है।










