किसानों को अब पराली जलाना नहीं पड़ेगा, पराली को बेचकर कमाई कर पाएंगे, पराली से बनेगी सड़क, जिससे पर्यावरण में प्रदूषण नहीं फैलेगा।
पराली से बनेगी सड़क
परली जो की फसल का अवशेष होता है, जब किसान खेतों में फसल की कटाई कर लेते हैं और उस अनाज को अलग कर लेते हैं तो जो बचा अवशेष होता है उसे परली कहा जाता है। पराली किसानों के बीच एक बड़ी समस्या है। कई किसान तो इसे खाद बनाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। लेकिन जिन किसानों के पास पहले से खाद बनाने का समय जगह नहीं होता तो वह इसे जला भी देते हैं। जिससे जल्दी से खेत खाली हो जाता है।
लेकिन इससे पर्यावरण में प्रदूषण फैलता है। दिल्ली एनसीआर में फैले प्रदूषण का एक कारण पराली जलाना भी है। जिसके लिए सरकार ने सख्त मना किया है। जुर्माना भी लगता है। ऐसे में किसान पराली का क्या करें, तो एक विकल्प यह है की प्रणाली की बिक्री कर सकते हैं। क्योंकि पराली से अब सड़क बनाई जाएगी। जी हां आपको बता दे की पराली से तारकोल बनाया जाएगा। जिससे सड़क बनेगी। यानी की सड़क बनाने में पराली का इस्तेमाल किया जाएगा।
पराली से बायो-बिटुमेन बनाने की खोज
पराली से अब बायो-बिटुमेन बनाया जाएगा, जिसमें जानकारी आ रही है कि भारत के दो बड़े सरकारी संस्थाओं के वैज्ञानिकों ने पराली से बायो-बिटुमेन बनाने की खोज की है। जिसमें सीएसआईआर केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान और सीएसआईआर भारतीय पेट्रोलियम संस्थान के वैज्ञानिकों ने यह सफलता प्राप्त की है। इस नई तकनीक में बायो-बिटुमेन बनाने के लिए पराली का इस्तेमाल किया जाएगा और फिर बायो-बिटुमेन से सड़क बनाई जाएगी।
पराली से बनी सड़के मजबूत
जैसा कि आप देखते हैं सड़कों में बहुत ज्यादा खर्च आता है, अगर यह बहुत दिनों तक नहीं चलती है तो इसमें सरकार को भी नुकसान होता है। लेकिन बताया जा रहा है कि पराली के बायो-बिटुमेन में से जो सड़के बनेगी वह ज्यादा मजबूत और टिकाऊ होगी और लंबे समय तक चलेंगी। साथ ही उन्हें बार-बार मरम्मत भी नहीं करना पड़ेगा। जिससे यह खर्चा भी बच पाएगा। इस तरह से सरकार को भी पराली से फायदा होगा। किसानों के खेतो से निकली पराली कचरे नहीं खजाने की तरह काम करेगी।
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