DAP की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है। जिससे किसानों को सीधा नुकसान होगा। किसानों को ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे। साथ ही डीएपी की समस्या भी जल्दी बढ़ सकती है।
युद्ध के कारण DAP के बढ़ते भाव
खाड़ी क्षेत्र में इस समय युद्ध देखने को मिल रहा है। जिससे देश भर में फर्क पड़ रहा है, और किसानों पर भी इसका असर पड़ रहा है। भारत में खाद की कीमत बढ़ रही है। कच्चे तेल और एलएनजी के भाव भी बढ़ रहे हैं। यूरिया डीएपी जो कि किसानों के लिए बहुत ज्यादा जरूरी होती है। वह भी महंगी हो रही है। जिसमें विशेषज्ञ कहते हैं कि इसी तरह का हालत रहा तो यूरिया ₹1000 डॉलर प्रतिदिन हो सकती है। जिसमें यह भी कहा गया कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान से डर का माहौल और ज्यादा बढ़ गया है। कई हफ्ते तक इसी असमंजस में रहना पड़ेगा। आईए जानते हैं खाद के दाम कितने बढ़ रहे हैं।
डीएपी-यूरिया के दाम में कितनी हुई बढ़त
डीएपी-यूरिया के भाव में बढ़त देखी जा रही है। जिसमें बताया गया कि मिश्र ने कुछ दिन पहले यूरिया 492 डॉलर में खरीदा था लेकिन पश्चिम एशिया में सैन्य कार्रवाई होने के बाद 530 डॉलर कीमत हो गई डीएपी की भी बात की जाए तो 750 डॉलर थी जो अब बढ़कर 1000 डॉलर प्रतिदिन हो चुकी है। अब जो किसान रबी फसल की कटाई के बाद दूसरी फसलों की खेती करेंगे तो खाद की उन्हें समस्या देखने को मिल सकती है।
खाद के भाव बढ़ने पर सरकार का बोझ बढ़ेगा
किसानों को खाद पर सब्सिडी दी जाती है। लेकिन अगर खाद के भाव बढ़ेंगे तो इसका असर किसानों पर भी होगा, किसानों को ज्यादा सब्सिडी देनी पड़ेगी। क्योंकि अंतरराष्ट्रीय हालात पर खाद के भाव निर्भर करते हैं। इस साल फास्फेट और पोटाश खाद के लिए 49000 करोड रुपए की सब्सिडी का बजट बना था, लेकिन उसे 60000 करोड रुपए किया गया, और फिर घटकर 54 हजार करोड़ रुपये किया गया।
इसके अलावा यूरिया की सब्सिडी कम हुई है। लेकिन इस तरह के हालात आ गए तो किसानों को सरकार ज्यादा सब्सिडी दे सकती है। क्योंकि हमारा देश फास्फेट और पोटाश जैसी खाद का 90% हिस्सा आयात करता है, मोरक्को के पास दुनिया का 70% फास्फेट भंडार उपलब्ध है। अन्य देशों में भी इसी तरह ज्यादा है।









