Pearl Farming: जमीन नहीं है तो छत से भी कमाई कर सकते हैं, तो आइये आपको बताते हैं यह कौन सी खेती है, जो छत पर होती है, और लाखों का मुनाफा देती है।
छत पर मोती की खेती
दरअसल, यहां पर छत पर मोती की खेती के बात की जा रही है। जिससे अच्छा खासा मुनाफा कमाया जा सकता है। यह व्यवसाय छत से शुरू किया जा सकता है। जिसके लिए ज्यादा सामान की जरूरत भी नहीं पड़ती। अगर आपके पास पानी का अच्छा स्रोत है तो इस खेती को कर सकते हैं, और इसमें खर्च भी कम आता है। अगर ज्यादा मुनाफा कम जमीन से लेना चाहते हैं, तो छत पर मोती की खेती कर सकते हैं। आइये बताते हैं इसकी यह खेती कैसे होती है, किन चीजों की जरूरत पड़ती है, कितना खर्च आता है।
मोती की खेती में खर्चा और कमाई
मोती की खेती के लिए पानी की ज्यादा जरूरत पड़ती है। जिसमें टब या फिर टैंक ले लीजिए और उसमें पानी भर लीजिए। पानी में जो भी गंदगी रहेगी उससे यह मोती बढ़ते हैं। फिर इस पानी में मोती के बीजों को डाला जाता है। जिसमें एक सीप में 45 रुपए का खर्चा होता है और एक सीप से चार से पांच मोती बन जाते हैं। जो की ₹300 तक में बिक जाते हैं। अगर 15- ₹20,000 का खर्चा करके छत पर मोती की खेती करते हैं तो 50 से ₹60000 की कमाई हो जाती है। इसके बाद और इसमें खर्च कर सकते हैं।
क्योंकि शुरुआत में पहली बार अगर कोई मोती की खेती करने जा रहा है, तो उसे कम निवेश में शुरू करना चाहिए। ताकि खेती का तजुर्बा भी हो जाए कि आप कर पाएंगे या नहीं। आईए जानते हैं इसकी खेती के बारे में कैसे सीखे।
पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग
मोती की खेती के लिए ट्रेनिंग ले सकते हैं। विभिन्न जगहों में पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग दी जाती है। अपने शहर में भी पता कर सकते हैं कि पर्ल फार्मिंग ट्रेनिंग मिल रही है या नहीं। बिना प्रशिक्षण लिए मोती की खेती नहीं करनी चाहिए। प्रशिक्षण के बाद ही किसी चीज में निवेश करना चाहिए। मोती की खेती के लिए प्रशिक्षण 5 से 15 दिन के बीच में दिया जाता है। कुछ सरकारी संस्थाएं भी हैं जो कि मोती की खेती का प्रशिक्षण देती है।
जैसे कि केंद्रीय मीठे जल मत्स्य पालन अनुसंधान संस्थान भुवनेश्वर में ट्रेनिंग मिलती है। जिसमें सीप की सर्जरी और मोती की गुणवत्ता का प्रबंध करने के बारे में बताया जाता है। क्षेत्रीय केंद्र और कृषि विज्ञान केंद्र में इसका प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं।
यह भी पढ़े- Sandalwood: एक एकड़ में 5 करोड़ रु कमा सकते हैं किसान, जानिए खेती का तरीका और खर्चा









