मछली पालकों के लिए बड़ी सौगात, भारत की पहली ओपन-सी समुद्री मछली पालन प्रोजेक्ट का हुआ शुभारंभ

On: January 20, 2026 1:50 PM
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ओपन-सी समुद्री मछली पालन

भारत के पहले ओपन-सी समुद्री मछली पालन परियोजना को लांच किया गया है। जिससे ब्लू इकोनामी को बहुत ज्यादा फायदा होगा।

ओपन-सी समुद्री मछली पालन

भारत के मछली पालको के लिए यह बड़ी सौगात है। जिसमें देश के पहले ओपन-सी समुद्री मछली पालन परियोजना को लांच किया गया है। जिससे माना जा रहा है की ब्लू इकोनामी को इससे बहुत ज्यादा लाभ होगा। बताया जा रहा है कि अंडमान सागर में पहली ओपन सी खुले समुद्र में मछली पालन परियोजना का शुभारंभ हुआ है। जिसमें अब खुले समुद्र में समुद्री मछली का पालन किया जाएगा। बता दे कि केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री, स्वतंत्र प्रभार डॉ जितेंद्र सिंह ने इस परियोजना का शुभारंभ किया है। जिसमें समुद्री संसाधनों का उपयोग अब हो पाएगा।

समुद्र आधारित अर्थव्यवस्था का विकास

इस तरह से समुद्र आधारित अर्थव्यवस्था का विकास होगा। डॉ जितेंद्र सिंह का कहना था कि इस परियोजना के आने के बाद समुद्रों के आर्थिक क्षमता को साकार किया जाएगा। कई दशकों तक समुद्री संसाधनों पर ध्यान नहीं दिया गया। मगर अब बदलाव देखने को मिलेगा। यह देश के आर्थिक विकास को बढ़ाने में मदद करेंगे। इसको शुरू करने के पीछे सरकार का यह भी उद्देश्य है कि वैज्ञानिक नवाचार के माध्यम से आजीविका के नए अवसर खुलेंगे। समुद्री संसाधनों का इस्तेमाल हो पाएगा जिससे मछली पालन के व्यवसाय में बढ़ोतरी होगी।

ओपन-सी समुद्री तकनीकी का होगा इस्तेमाल

खुले समुद्र में मछली पालन के लिए ओपन-सी का इस्तेमाल किया जाएगा। बताया जा रहा है कि एनआईओटी द्वारा ओपन-सी केज तकनीकी को विकसित किया है। जिसका इस्तेमाल अब फिनफिश पालन के लिए किया जाएगा। इस तरह से खुले समुद्र और प्राकृतिक परिस्थितियों में काम करने में ओपन-सी केज से मदद मिलेगी। इस परियोजना के अंतर्गत प्राकृतिक समुद्री परिस्थितियों में समुद्री फैन फिश और समुद्री सवाल की ओपन-सी में खेती होगी।

डॉ जितेंद्र सिंह द्वारा मछुआरों को समुद्री सवाल के बीज मिले हैं। इस तरह से अब पिंजरा आधारित पालन के लिए फिनफिश के बीज बांटे गए हैं। इस परियोजना में सफलता मिलती है, तो इसे अन्य जगहों में भी लागू किया जाएगा। बताया जा रहा है कि पायलट परियोजना के अंतर्गत इसे शुरू किया गया है। जिसमें पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय राष्ट्रीय समुद्र औद्योगिकी संस्थानो और अंडमान एवं निकोबार दीप समूह प्रशासन के सहयोग से इसे चलाया जा रहा है, जो की ब्लू इकोनामी में तेजी लाने में मददगार साबित हो सकता है।

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