किसानों पशुपालकों को उन्नत नस्ल की साहीवाल, थारपारकर, गिरी जैसी गाय दिलाने के लिए पशुपालन विभाग में यह योजना चलाई जा रही है।
पशुपालन विभाग की योजना
किसानों और पशुपालकों की मदद करने के लिए पशुपालन विभाग में कई तरह की योजनाएं चलाई जा रही है। जिसमें आज एक ऐसी योजना के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे उन्नत नस्ल की बछिया यह बछड़ा मिल सकता है। खेती में भी गाय और बैल की जरूरत पड़ती है, पशुपालकों को तो उन्नत नस्ल की गाय और बैल दोनों की जरूरत होती है। जिससे वह अपने दूध उत्पादन का व्यवसाय बढ़ा सकते हैं। दरअसल यहां पर बात की जा रही है मध्य प्रदेश की नंदी शाला योजना की, चलिए बताते हैं यह कौन सी योजना है, इसमें क्या फायदा मिलता है।
नंदी शाला योजना
नंदी शाला योजना के तहत किसानों और पशुपालन को दोनों को लाभ मिलता है। कोई भी वर्ग के किसान या पशुपालक जिनके पास खेती योग्य जमीन है या फिर वह पशुपालन करते हैं तो दोनों लोग इस योजना का फायदा उठा सकते हैं। नंदी शाला योजना के तहत एक उन्नत नस्ल का सांड दिया जाता है। जिससे आप देसी गाय को क्रॉस करके भी बढ़िया नस्ल की बछिया या बछड़ा प्राप्त कर सकते हैं। सांड का इस्तेमाल खेती में भी किया जाता है। इसमें 75% अनुदान उन्नत नस्ल के स्थान पर दिया जाता है। इस योजना के तहत सिर्फ साड़ ही नहीं बल्कि उसके दो महीने के लिए पशु आहार भी दिया जाता है।
जिससे कुछ दिनों तक आपको उसके पालन में समस्या नहीं आएगी। इस योजना के तहत सांड में आपको साहीवाल, थारपारकर, निमाड़ी, केनकथा, गिर, मालवी जैसे उन्नत नस्ल प्राप्त कर सकते हैं। जिसका इस्तेमाल उन्नत नस्ल की गाय पाने में किया जाता है और खेत तैयारी में भी मदद मिलती है। छोटे किसानों के लिए यह योजना बहुत ही ज्यादा लाभकारी होती है, अभी इसकी डिमांड पहले से कम हो गई है।
नंदी शाला योजना का फायदा कैसे उठाएं
किसान या पशुपालक नंदी शाला योजना का फायदा उठाना चाहते हैं तो उसके लिए उन्हें अपने नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र में संपर्क करना चाहिए। वहां पर आवेदन फॉर्म मिलेगा। जिसे भरकर योजना का फायदा उठा सकते हैं। नंदी साल योजना के तहत 75% अनुदान पर एक उन्नत नस्ल का सांड दिया जाता है।









