अगर किसान भाइयों पानी की समस्या है तो लगाएं यह फसल, जिसमें खाद भी नहीं लगता और कमाई भी अच्छी होती है।
अरंडी की खेती में कमाई
अरंडी की खेती से किसान अच्छी कमाई कम लागत में प्राप्त कर सकते हैं। इसका भाव इस समय ₹10000 प्रति क्विंटल मिल रहा है। वही उत्पादन एक एकड़ से 8 से 10 क्विंटल तक मिल जाता है, तो इस हिसाब से कमाई का अंदाजा लगा सकते है। लाखों रुपए का मुनाफा कमा सकते हैं। इसकी खेती में कई फायदे हैं जैसे की पानी की कम जरूरत होती है। अगर ड्रिप सिस्टम लगवा देते हैं तो और ज्यादा पानी कम लगेगा। बिल्कुल पानी बर्बाद नहीं होगा। कम पानी में खेती कर पाएंगे तो आईए जानते हैं इसकी खेती कब, और कैसे की जाती है, कितना समय लगता है।
अरंडी की खेती कब और कैसे की जाती है
अरंडी की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी बढ़िया मानी जाती है। अगर मिट्टी कम उपजाऊ है तो इसकी खेती तब भी कर सकते हैं। लेकिन जल निकासी वाली मिट्टी होनी चाहिए। क्योंकि इसे पानी की भी कम जरूरत पड़ती है। लाल मिट्टी और हल्की जलोढ़ मिट्टी में भी अरंडी की खेती कर सकते हैं। जल भराव बस खेत में नहीं होना चाहिए। खेत की तैयारी करने के लिए मिट्टी की गहरी जुताई करें। जिससे जड़ों का विकास अच्छे से होगा, उत्पादन भी बढ़िया मिलेगा। इसकी खेती कम उपजाऊ मिट्टी में ही बेहतर मानी जाती है।
बुवाई के समय इस खाद भी नहीं दी जाती है। अगर मिट्टी ज्यादा उपजाऊ हुई तो पौधे का विकास ज्यादा होगा। बीज कम मिलेंगे। इसलिए इसकी फसल में अन्य फसलों की तुलना में उल्टा देखने को मिलता है। अरंडी की फसल लगा रहे हैं तो दो पौधों के बीच की दूरी 1 फीट और दो बेड के बीच की दूरी 6 फिट रखें। जुलाई अगस्त में अरंडी की खेती की जाती है। बीजों को हाथों से बेड पर लगाया जाता है।
इसमें कीटनाशक का इस्तेमाल किया जाता है। जिससे फसल को कीटों से बचाया जाए। इसके लिए कीटनाशक स्प्रे किया जाता है। अरंडी की फसल करीब 6 माह में तैयार हो जाती है। इसके बाद इसकी कटिंग करके सुखाया जाता है, और फिर थ्रेसर से बीजों को निकाला जाता है।











