घर में उगाएं काली गाजर रोगों से रहे दूर, पड़ोसी भी देखे होंगे हक्के-बक्के, जाने काली गाजर कैसे लगाएं

On: January 14, 2026 3:30 PM
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काली गाजर कैसे लगाएं

घर में अगर काली गाजर लगाना चाहते हैं तो छत या बालकनी पर इसे उगा सकते हैं आईए जानते हैं काली गाजर कैसे लगाएं, तरीका क्या है।

काली गाजर खाने के फायदे क्या है

काली गाजर सेहत के लिए बहुत ही ज्यादा लाभकारी होती है। इसका रंग सामान्य गाजर से अलग होता है। काली गाजर में एंटीऑक्सीडेंट अच्छी मात्रा में होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं। इसमें फाइबर और आयरन भी अच्छी मात्रा में होता है। इसके सेवन से पाचन तंत्र बढ़िया होता है, खून की कमी नहीं होती है, बीमारियों से आप दूर रहेंगे। इसका स्वाद हल्का खट्टा मीठा रहता है। काली गाजर का सलाद, जूस और कांची बनाकर इसका सेवन कर सकते हैं। जिसका स्वाद अच्छा होता है।

काली गाजर कैसे लगाएं

काली गाजर को घर पर गमले में उगा सकते हैं या बगीचे में जमीन पर भी इसे लगा सकते हैं। इसके लिए मिट्टी तैयार कर रहे हैं तो बढ़िया भुरभुरी मिट्टी तैयार करें। गमले में लगा रहे तो 12 से 14 इंच का गमला या ग्रो बैग का चुनाव करें। जिसमें जड़ों का अच्छे से विकास हो पाए।

सेहत के लिए काली गाजर फायदेमंद है। इसलिए सिर्फ जैविक खाद का इस्तेमाल करें। केमिकल वाली खाद न डालें। जिसमें पुरानी से पुरानी गोबर की खाद मिट्टी में मिलाये। साथ ही कोकोपीट या फिर रेत थोड़ी सी मिट्टी में मिलाना है। बीजों को बुवाई से पहले ध्यान दें मिट्टी हल्की गली होनी चाहिए और दो बीजों के बीच में थोड़ा अंतर भी होना चाहिए।

बीजों को बहुत ज्यादा गहराई में दबाना नहीं है। बल्कि ऐसे ही छिड़कने के बाद ऊपर से हल्की मिट्टी से दबाना है। पानी देते समय ध्यान रखें बहुत ज्यादा पानी न दे जब मिट्टी के ऊपर से सूखने लगे तभी पानी देना है। जहां पर कम से कम 5-6 घंटे की धूप आती हो। वहां पर इसका पौधा लगाए 90 से 100 दिन के बीच में काली गाजर तैयार हो जाती है। जिसके बाद इसे मिट्टी से निकाल कर अच्छे से साफ करके इसका सेवन कर सकते हैं।

काली गाजर के लिए कैसी जलवायु चाहिए

काली गाजर लगा रहे हैं तो जलवायु का भी ध्यान रखें। जिसमें माध्यम ठंडी जलवायु इसके लिए अच्छी होती है। डिग्री सेल्सियस में बात करें तो 15 डिग्री सेल्सियस से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच का तापमान इसके जड़ों के विकास के लिए अच्छा माना जाता है। इसका रंग भी बढ़िया आता है। ठंडी जलवायु की यह फसल मानी जाती है। जहां पर ज्यादा गर्मी पड़ती है वहां पर अगर इसे लगाते हैं तो इसका स्वाद बदल सकता है, तथा यह और कठोर भी हो सकती है। हल्की ठंड आपके यहां पड़ रही है तो इसे लगा सकते हैं।

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