गेहूं किसानों इस गलती से बचे, उन्हें कानून के सख्त दंडो को झेलना पड़ सकता है, आईए जानते हैं कलेक्टर के निर्देश।
स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम अनिवार्य
गेहूं की खेती करने वाले किसान गेहूं की कटाई के बाद अगर नवाई मतलब की पराली जिसे फसल अवशेष भी कहते हैं अगर उसे जला देते हैं तो उन पर सख्त कार्यवाही होगी। क्योंकि स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम अनिवार्य कर दिया गया है। अगर किसान मशीन से गेहूं की कटाई कर रहे हैं तो स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम लगाकर ही कटाई करें और नार्वे ना जलाएं। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने कहा है कि अगर किसान फसल अवशेष जलते हैं तो उन पर कार्यवाही होगी। इस पर प्रतिबंध लगाया गया है। हार्वेस्टर मशीन से कटाई करते हैं तो स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम का इस्तेमाल करें।
पराली जलाने के नुकसान
पराली जलाने के नुकसान के बारे में बताया गया कि इससे वायु प्रदूषण होता है, मिट्टी खराब होती है, मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है यानी कि किसान को ही नुकसान होगा, इसलिए हर तरह से यह नुकसानदायक होता है। अगर आग लग जाती है तो और बड़ी गंभीर समस्या खड़ी हो जाती है। कुछ किसानों की फसल अगर खेत में रखी हुई है तो उनकी फसल भी जल सकती है।
पराली जलाने वालों पर दंडात्मक कार्यवाही के निर्देश
अगर किसान पहले जलते हुए पकड़े जाते हैं तो उन पर दंडात्मक कार्यवाही होगी। बताया जा रहा है कि जो भी आदेश का उल्लंघन करेंगे उनके खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम एवं अन्य प्रासंगिक नियमों के तहत कठोर कार्रवाई हो सकती है। इसीलिए किसानों से अपील की जा रही है कि वह पराली को ना जलाएं स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम का इस्तेमाल करें, पर्यावरण संरक्षण में सहभागी बने, कृषि विभाग जनपद पंचायत स्तर के अधिकारी और अमला आपसी समन्वय से प्रभावित तरीके से लागू कर रहे हैं।
अधिकारियों को यह निर्देश मिले हैं कि अनु विभाग स्तर पर बैठक करके एसएमएस सिस्टम लागू किया जाए, जिले के बाहर या अंदर जो भी हार्वेस्टर या कृषि यंत्र संचालक है पराली ना जलाने और एसएमएस का उपयोग के संबंध में लिखित रूप से जानकारी दें, इस तरह से पूरी नियम से किसान काम करें।











