प्राकृतिक खेती में किसानों का सहयोग करने के लिए उनके खाते में दो ₹2000 दिए गए हैं। जिसमें कुल किसानों को 10 करोड रुपए की प्रोत्साहन राशि मिली है।
राज्य स्तरीय कार्यशाला एवं जागरूकता कार्यक्रम
किसानों के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं मानी जा रही है। प्राकृतिक खेती से खेत की मिट्टी उपजाऊ होती है, पर्यावरण में प्रदूषण नहीं फैलता है, और जो भी अनाज उत्पन्न होता है उसमें किसानों में किसी तरह की बीमारी नहीं होती है। ना ही नुकसानदायक होता है। इसलिए प्राकृतिक खेती सभी के लिए बहुत ही ज्यादा जरूरी हो गई है। इसीलिए सरकार भी किसानों को इसके लिए प्रोत्साहित कर रही है, और शुरुआत में उन्हें मदद भी दे रही है। जिसमें बिहार के बामेती सभागार में एक दिन का राज्य स्तरीय कार्यशाला एवं जागरूकता कार्यक्रम हुआ। जिसमें प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित किया गया।
इस कार्यक्रम में कृषि मंत्री राम कृपाल यादव थे जिन्होंने कहा कि रसायन मुक्त खेती से मिट्टी स्वस्थ होती है, सुरक्षित अन्न उत्पन्न होता है, समृद्धि किसान का लक्ष्य सरकार हो रहा है, और किसानों को जड़ों की तरफ लौटने में मदद मिल रही है। प्राकृतिक खेती अपनाकर किसान पर्यावरण की रक्षा कर रहे हैं, मिट्टी पानी को स्वस्थ रख रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती कम खर्चे में ज्यादा लाभ किसानों को देती है, इसलिए इस रसायन मुक्त खेती में सरकार किसानों की मदद कर रही है।
प्राकृतिक खेती के लिए अनुदान योजनाएं
कृषि मंत्री ने कहा कि जैविक गलियारा प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम जैसे विभिन्न तरह की योजनाएं जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए चलाई जा रही है, और विभिन्न अनुदान योजनाएं भी राज्य में चल रही है जैसे किसानों को आर्थिक रूप से सहयोग दिया जाता है। प्राकृतिक खेती के लिए राज्य में 38 जिलों में 400 समूह बनाए गए हैं। जिसमें कुल 50000 एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती की जा रही है।
किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए मिलते हैं ₹4000
जिसमें प्राकृतिक खेती के लिए किसानों को साल में दो सीजन के लिए ₹4000 मिलते हैं। खरीफ सीजन के लिए ₹2000 और रबी सीजन के लिए ₹2000. जिसमें प्राकृतिक खेती योजना में जिन किसानों का चयन हुआ है उनके खाते में ₹2000 प्रति एकड़ की दर से राशि जारी की गई है। कुल किसानों को 10 करोड रुपए मिले हैं जो की डीबीटी के माध्यम से किसानों के खाते में भेजा गया है। बता दे कि कार्यक्रम के दौरान राज्य सरकार की तरफ से किसानों को यह सौगात दी गई है।
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