इंजीनियरिंग नहीं खेती को बनाया कमाई का जरिया, अमरुद की ये वैरायटी लगाकर आधा एकड़ से तगड़ी कमाई, ₹120 प्रति किलो भाव मिला

On: February 1, 2026 4:37 PM
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किसान की सफलता की कहानी

इस लेख में युवा किसान की सफलता की कहानी जानने जा रहे हैं जिन्होंने इंजीनियरिंग के बजाय खेती को बनाया कमाई का जरिया।

खेती को बनाया कमाई का जरिया

कम जमीन से ज्यादा कमाई करना चाहते हैं तो इस तरह के युवा किसानों की सफलता की कहानी बहुत ही ज्यादा मदद देती है। जिससे उन्हें प्रोत्साहन भी मिलता है। बता दे किसान का नाम गोविंद राम है जो कि छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के रहने वाले हैं। आपको बता दे की उन्होंने पॉलिटेक्निक से माइनिंग की पढ़ाई की हुई है।

लेकिन बाद में यह इंजीनियरिंग करने के बजाय खेती को अपनाया, और 15 से 20000 की नौकरी को छोड़कर अमरुद की खेती से अच्छी कमाई कर रहे हैं तो आइये बताते हैं वह अमरूद की कौन सी वेराइटी लगा रहे हैं, कितना भाव मिलता है, इसका आकार क्या है, कितने समय में तैयार हुई है।

अमरूद की कौन सी वैरायटी है

किसान अमरूद की व्यवसायिक खेती करना चाहते हैं तो उन्हें उन्नत किस्म का चयन करना चाहिए। जिसमें किसान ने बताया कि उन्होंने अमरूद की बीएनआर वैरायटी लगाई हुई है। जिसका एक फल का वजन 300 से 400 ग्राम होता है, और इसकी कीमत एक ₹120 किलो तक मिल जाता है। किसान ने बताया कि आधा एकड़ की जमीन में उन्होंने 250 पौधे लगाए हुए हैं। इससे अच्छा उत्पादन मिलता है। पहले उन्होंने सिक्योरिटी की नर्सरी तैयार की थी।

उसके बाद खेतों में रोपाई की थी वह बताते हैं कि उनके लगाए गए पौधे 14 से 16 महीने के हो चुके हैं जो कि अब अच्छा उत्पादन और दे रहे हैं। जिसमें नवंबर महीने में उन्होंने पौधों की रोपाई की थी। अगर अमरूद की VNR वैरायटी को सही तरीके से उपजाऊ जमीन मिल जाती है तो उसके फलों का आकार 300 ग्राम से 1 किलो तक हो सकता है। इसमें बीज भी कम होते हैं और कुरकुरापन के लिए भी वैरायटी प्रसिद्ध है और इसकी सेल्फ लाइन भी ज्यादा होती है।

अमरूद का पौधा कहां से कितने में लिया

अमरूद की खेती व्यावसायिक तौर पर करना चाहते हो तो इसके लिए आपको सही जगह से भी पौधा खरीदना चाहिए। जिसमें किसान ने बताया कि उन्होंने रायपुर से पौधा लाया है, जो की ₹400 का था। वह बताते हैं कि अमरूद की खेती में सब्जियों की तुलना में कम देखभाल की जरूरत पड़ती है। लेकिन उन्होंने खेती का तरीका भी सही अपनाया है. जिसमें उन्होंने पॉली हाउस में खेती की थी.

पॉली हाउस में तापमान का नियंत्रण रहता है। बता दे कि इसके साथ उन्होंने बीच-बीच में सब्जियां भी लगा ली है जैसे कि पत्ता गोभी आदि सब्जियों को उन्होंने बीच-बीच की खाली जगह में लगा दी है। जिससे बीच-बीच में कमाई भी होती रहती है।

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