पशुपालकों को अगर गर्मियों में हरा चारा की समस्या आती है तो आईए जानते हैं कौन से चारे की खेती करें किसमें फायदा होगा।
पशुओं के लिए गर्मी में हरे चारे की समस्या
पशुओं को गर्मी में अगर हरा चारा नहीं मिलता तो दूध उत्पादन कर सकते है ऐसे में पशुपालकों को नुकसान हो जाता है। इसलिए हरा चारा की व्यवस्था करने पशुपालकों को अभी से ही पड़ेगा। जिसमें फरवरी मार्च या अप्रैल तक कौन से हरा चारा की खेती कर सकते हैं, किसमें फायदा है, आइये इस लेख में इसी के बारे में हम जानने जा रहे हैं। क्योंकि पशुपालन कर रहे हैं। डेरी का व्यवसाय है तो हरा चारा बहुत ज्यादा जरूरी हो जाता है, तभी दूध उत्पादन अच्छा मिलता है, और कमाई भी बढ़िया होती है।
रिजका की खेती
रिजका पशुओं के लिए पौष्टिक फलीदार चारा होता है। उत्तर पश्चिम भारत में से बहुत ज्यादा पसंद किया जाता है। इसमें प्रोटीन की मात्रा 18 से 19% को होती है। जिससे पशुओं के दूध उत्पादन की क्षमता बढ़ती है। पशुओं के लिए यह चारा फायदेमंद होता है। इसकी खेती करके गर्मियों में हरे चारे की समस्या से छुटकारा पाया जाता है।
इसकी खेती के लिए खेत की दो-तीन बार गहरी जुताई करें और फिर बुवाई करें। एक हेक्टेयर में 20 से 25 किलो बीज की जरूरत पड़ती है। कतार विधि या फिर मेड में बीजों को लगा सकते हैं, 55 से 60 दिन में फसल तैयार हो जाती है। उसके बाद जरूरत के अनुसार कटाई कर सकते हैं।
लोबिया की खेती
लोबिया की खेती में किसानों और पशुपालकों को भी फायदा है। क्योंकि इसकी सब्जी भी बनाई जाती है, और खाद के तौर पर भी इसका इस्तेमाल किया जाता है, और चारा के तौर पर भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें 17 से 18% प्रोटीन होता है, जो कि पशु का दूध बढ़ाने में मदद करेगा। लोबिया की खेती एक हेक्टेयर में करते हैं तो 30 से 35 किलो बीजों की जरूरत पड़ती है। लोबिया की खेती चारे के लिए कर रहे हैं तो 50 से 65 दिन के बीच में फसल तैयार हो जाती है। मार्च में लोबिया की खेती किसान कर सकते हैं।
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