किसान तुलसी की खेती करना चाहते हैं तो आइये इस लेख के जरिए बताते हैं तुलसी की खेती में कितनी कमाई है, कितना समय लगता है, कैसे खेती होती है।
तुलसी की खेती में फायदा
तुलसी की खेती में किसानों को फायदा है, कम लागत ज्यादा मुनाफा है। किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं। दो से तीन कटाई 1 साल में किसान इससे ले सकते हैं और इसमें पानी भी कम लगता है। आयुर्वेद में इसकी डिमांड है। यह एक औषधि फसल है। जिसमें जोखिम कम होता है। आसानी से कोई भी नया किसान तुलसी की खेती कर सकते हैं।
तुलसी की मांग कई बड़े आयुर्वेदिक कंपनियां करती हैं, जैसे की पतंजलि, आयुर्वेद, डाबर इत्यादि स्थानीय बाजारों में भी तुलसी की मांग रहती है। किसान तुलसी की पत्तियों को, तुलसी के तेल को और तुलसी के पौधों को, तुलसी के बीजों की बिक्री कर सकते हैं तो आइये जानते हैं इसकी खेती में कमाई के बारे में।
तुलसी की खेती में कमाई
तुलसी की खेती से कमाई इस पर निर्भर करती है की किसकी बिक्री कर रहे हैं, कितना उन्हें उत्पादन मिल रहे हैं, कौन सी वेराइटी लगा रहे हैं, सामान्य तौर पर एक एकड़ में 8 से 10 क्विंटल सूखी पत्तियां मिल जाती हैं, और 70 से 100 किलो तक तुलसी का तेल निकल जाता है। जिसमें सूखी पत्तियों का औसत भाव 20 से 30 रुपए किलो बताया जाता है, और तुलसी का जो तेल है उसका भाव 900 से ₹1500 किलो तक बताया जाता है। जिसमें पत्तियां को बेचकर 1.5 लाख से 2.5 लाख रुपए तक किसान कमा सकते हैं और तेल की बिक्री करके भी ₹100000 तक कमाई कर सकते हैं।
इस तरह से एक एकड़ से खर्चा निकालने के बाद भी किसान एक से दो लाख रुपए तक शुद्ध मुनाफा ले सकते हैं। तुलसी की मांग आयुर्वेदिक कंपनी, हर्बल दवा बनाने वाली कंपनी, तुलसी की चाय, काढ़ा बनाने वाली कंपनी, पूजा सामग्री बाजार इत्यादि में मांग है।
तुलसी की खेती का समय
तुलसी की खेती के फायदे को देखते हुए अगर किसान तुलसी की खेती के लिए इच्छुक है तो समय का भी ध्यान रखें। फरवरी के मध्य से मार्च के बीच तुलसी की खेती कर सकते हैं। मतलब कि इस समय तुलसी की खेती किसान कर सकते हैं। जुलाई-अगस्त में भी बरसात के मौसम में तुलसी लगा सकते हैं। यानी कि बसंत ऋतू और बरसात में तुलसी की खेती की जाती है। गर्म और हल्की नमी वाला मौसम इसकी खेती के लिए अच्छा होता है। ठंड पाला में तुलसी को नुकसान होता है। जिससे किसानों को तुलसी का बचाव करना पड़ता है।
तुलसी की खेती कैसे करें
तुलसी की खेती करने के लिए सबसे पहले बीजों की बुवाई की जाती है, नर्सरी तैयार की जाती है। नर्सरी आप ट्रे में या क्यारियों में लगाकर कर सकते हैं। जब उसमें चार से पांच पत्तियां आने लगे और वह 6 सप्ताह की हो जाए तो खेतों में उसे लगा सकते हैं। सही दूरी पर पौधों की रोपाई कर रहे हैं तो दो पौधों के बीच की दूरी 40 से 50 सेमी रखें।
अच्छा उत्पादन लेने के लिए खेत में गोबर की खाद डाल सकते हैं, पुरानी खाद डालेंगे तो अच्छा रहेगा। बुवाई के बाद 15 दिनों के अंदर में सिंचाई करें, मौसम के अनुसार सिंचाई करें, मिट्टी में पानी की जरूरत है तो जल्दी सिंचाई करें, लेकिन पानी खेत में ना भरे इसका ध्यान रखें।
गमले में तुलसी कैसे लगाएं
गमले में तुलसी लगाना चाहते हैं तो 10-12 इंच का बड़ा गमला लें, उसमें नीचे छेंद कर दीजिए और फिर मिट्टी तैयार करके उसमें भरें। 50% मिट्टी में 30% गोबर की खाद और 20% रेत मिलाकर बीज मिट्टी में डालें और हल्की सिंचाई करें। तुलसी के पौधे को ऐसी जगह पर लगाएं जहां से 6 से 8 घंटे के धूप आती हो और उसे गोल आकार देने के लिए बीच-बीच में कटिंग करते रहे। जिससे वह घनी हो जाएगी और मौसम के अनुसार उसका बचाव करें। सर्दियों में उसे पाला से बचाए गर्मियों में तेज धूप से बचाएं और समय पर पानी दे।
तुलसी की फसल कितने दिन में तैयार होती है
यह लम्बी अवधि की फसल है। तुलसी की फसल 70 से 90 दिन में पहली कटाई के लिए तैयार हो जाती है। फिर 60-70 दिन में दूसरी कटाई कर सकते हैं। साल में दो से तीन कटाई इससे किसान ले सकते हैं। 5 से 6 महीने की एक फसल होती है। लंबी अवधि तक इसमें किसानों को मुनाफा है। एक बार किसान इसकी खेती करते हैं तो लगातार कई वर्षों तक भी उत्पादन ले सकते हैं। इसे कम पानी की जरूरत पड़ती है।
तुलसी की खेती में खर्चा
तुलसी की खेती में खर्च इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस तरीके से खेती कर रहे हैं। किन-किन संसाधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। जिसमें एक एकड़ में बीज से नर्सरी तैयार करने में 4 से ₹5000 का खर्चा आ जाता है। खाद बढ़िया डाल रहे हैं तो इसमें 10 15000 का खर्चा आ जाता है। मजदूरी के द्वारा खेती कर रहे हैं तो ₹20000 इसमें चले जाते हैं। वहीं सिंचाई इत्यादि अगर आपके पास सुविधा नहीं है खरीद कर पानी सींच रहे हैं तो उसमें भी ₹10000 खर्च हो सकते हैं।
इस तरह से कुल मिलाकर 60-70000 एक एकड़ में खर्चा आ सकता है। लेकिन यह किसान पर निर्भर करता है। अगर उनके पास सिंचाई की व्यवस्था है, खेती के लिए कृषि यंत्र है, मजदूरों का इस्तेमाल कम करते हैं और आपके पास जो भी खाद उपलब्ध है तो इन सब चीजों का खर्चा कम हो जाता है।











