ब्राह्मी की खेती से किसान कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं, यह एक औषधीय व्यावसायिक फसल है, आईए जानते हैं इसकी खेती के बारे में।
ब्राह्मी क्या है, और इसका इस्तेमाल कहां होता है
इस लेख में हम ब्राह्मी की खेती के बारे में जानेंगे। लेकिन इससे पहले जान लेते हैं कि आखिर यह है क्या, और इसका इस्तेमाल कहां पर हो रहा है, तो ब्राह्मी एक औषधीय फसल होती है। मतलब कि यह सेहत के लिए फायदेमंद होती है। आयुर्वेदिक दवा बनाने में इसका इस्तेमाल होता है। दिमाग की शक्ति को यह बढ़ाती है, याददाश्त को तेज करती है, तनाव को कम करने में मदद करती है, यह एक जड़ी बूटी होती है, जिसकी खेती किसान करके आयुर्वेदिक कंपनियां को इसे बेंच सकते हैं।
तो आईए जानते हैं इसकी खेती कहां होती है, कब होती है, कैसे होती है, कितना खर्चा आता है, कितनी कमाई होती है, कितना समय लगता है।
ब्राह्मी की खेती कैसे होती है
किसान बिल्कुल जैविक खाद का इस्तेमाल करके ब्राह्मी की खेती कर सकते हैं। जिससे खर्च कम होगा। रासायनिक खाद खरीद कर डालने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर आपके खेत की मिट्टी उपजाऊ है, नमी वाली है, दोमट मिट्टी है तो ब्राह्मी की खेती कर सकते हैं। जिसमें खेत की तैयारी करते समय पुरानी गोबर की खाद मिट्टी में मिलाना है, इसके बाद ब्राह्मी की नर्सरी लेकर आप इसकी रोपाई कर सकते हैं, या फिर तने की कटिंग ले सकते हैं, 6 से 8 सेंटीमीटर की कटिंग खेतों में लगा सकते हैं।
10×12 सेंटीमीटर की दूरी पर खेत में लगाएं, साथ ही ध्यान रखे लगातार नमी बनी रहे, पानी भरपूर मात्रा में सिंचाई के लिए उपलब्ध होता है, वहीं पर ब्राह्मी की खेती की जाती है।
ब्राह्मी की खेती में खर्च और कमाई
ब्राह्मी की खेती कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल कही जाती है। जिसमें किसान एक एकड़ में अगर ब्राह्मी की खेती करते हैं तो 20 से 35000 रुपए के बीच में 1 साल में लागत आती है। जिससे किसान 1.5 से ₹200000 तक कमा सकते हैं। यह शुद्ध मुनाफा बताया जा रहा है, दो से तीन बार कटाई की जाती है, कुछ किसान इसकी खेती भी करते हैं वह बताते हैं कि खर्चा निकालने के बाद 1,20,000 रुपए तक इससे कमाया जा सकता है। जो कि अच्छा विकल्प है।
ब्राह्मी की खेती कब की जाती है
ब्राह्मी की खेती किसान मई से जुलाई के बीच में कर सकते हैं। जब बरसात की शुरुआत होती है, उस समय इसकी खेती कर सकते हैं। ब्राह्मी की खेती के लिए भुरभुरी उपजाऊ नमी वाली जमीन अच्छी मानी जाती है। इसकी फसल 5 से 6 महीने में पहले कटाई के लिए तैयार हो जाती है। फिर तीन से चार महीने बाद फिर से काट लिया जाता है। इसकी कटाई अक्टूबर-नवंबर में फिर किसान कर लेते हैं। जब वह 25 से 30 सेंटीमीटर के हो जाते हैं।
इसको जड़ से चार से पांच सेंटीमीटर ऊपर से काट लिया जाता है। मतलब की 120-150 दिन में या पहली कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इस तरह से यह लंबी अवधि की फसल होती है।
ब्राह्मी की खेती में कितना उत्पादन मिलता है
ब्राह्मी की खेती किसान एक एकड़ में करते हैं, तो उन्हें 30 से 50 क्विंटल तक उत्पादन मिल जाता है। जिसमें यहां पर बात की जा रही है गीली पत्तियों की और तनो की, जिसमें किसान एक साल में दो से तीन बार कटाई करते हैं। एक बार आप इसे खेत में लगा देंगे तो, 4 साल तक उत्पादन मिल सकता है, क्योंकि जड़ के ऊपर से इसे काटा जाता है।
ब्राह्मी की खेती में फायदा क्या है
किसान भाइयों अगर आपको जंगली जानवरों का खतरा आ रहा है, खेती नहीं कर पा रहे हैं तो ब्राह्मी की खेती कर सकते हैं। क्योंकि ब्राह्मी की फसल को जंगली जानवर नहीं खाते। जिससे नुकसान नहीं होता। छुट्टा जानवर इस फसल को नहीं खाते हैं। यह एक औषधीय फसल होती है तो इसमें कीट रोग भी ना के बराबर रहता है। जिससे कीटनाशक का भी खर्चा नहीं आता। इसलिए यह कम लागत वाली खेती हो जाती है।
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