बच की खेती से छोटे किसान बनेंगे अमीर, जानिए बच की खेती की संपूर्ण जानकारी

On: February 22, 2026 7:09 PM
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बच की खेती की संपूर्ण जानकारी

बच की खेती किसानों को कम लागत में ज्यादा मुनाफा दे सकती है, आइये आपको बताते हैं बच की खेती की संपूर्ण जानकारी।

बच की खेती की संपूर्ण जानकारी

बच एक औषधीय फसल है। जिसकी खेती में किसानों को मुनाफा है। इसीलिए आज बच की खेती के बारे में जानेंगे। बच का इस्तेमाल कई तरह के आयुर्वेदिक दवाओं को बनाने के लिए किया जाता है। क्योंकि इसकी जड़ का इस्तेमाल याददाश्त बढ़ाने, चर्म रोग को ठीक करने, पेट रोगों को ठीक करने के लिए किया जाता है।

पत्तियों में नींबू जैसी सुगंध होती है, जो इसकी मीठी होती है, तेजी से सुगंध आती है, आईए जानते हैं इसकी खेती कब करते हैं, कैसे करते हैं, कितना खर्च आता है, कितनी कमाई होती है, कहां इसकी बिक्री की जाती है।

बच की खेती में खर्च और कमाई

बच की खेती कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल मानी जाती है। किसान बताते हैं कि इसकी जड़ आसानी से मिल जाती है जिससे इसकी खेती का खर्च घट जाता है। इसमें 20 से ₹25000 लगाकर किसान एक से डेढ़ लाख रुपए तक कमा सकते हैं। यह 1 एकड़ के अनुसार बताया जा रहा है। किसान ने कहा कि अनाज की खेती में उन्हें इतना फायदा नहीं होता, जितना उन्हें इस खेती में फायदा हो रहा है।

अगर किसानों के खेत की जमीन ज्यादा नमी वाली है, दूसरी फसल नहीं लगा पा रहे हैं तो बच की खेती कर सकते हैं। आईए जानते हैं इसकी खेती में कितना समय लगता है, कितना उत्पादन मिलता है।

बच की खेती में कितना उत्पादन मिलता है

बच के यदि 1 एकड़ में किसान करते हैं तो 1.5 से 2 टन तक उत्पादन मिल जाता है। बच की जड़ का औषधि रूप से इस्तेमाल किया जाता है। उत्पादन 10-20 क्विंटल सूखी जड़ें (राइजोम) निकलती है। जिन्हे सही से एकत्र करके किसान बेचते है।

बच का भाव कितना मिलता है

बच के भाव के बात करें तो 90 से ₹250 किलो तक इसका रेट मिलता है। अगर जड़ की गुणवत्ता अच्छी होती है तो इसका रेट ज्यादा भी किसानों को मिल सकता है। जिसमें इस समय दिल्ली में करीब ₹90 से ₹150 प्रति किलो, हैदराबाद में ₹150 से ₹210 प्रति किलो, बेंगलुरु में ₹250 प्रति किलो तक मिल रहा है। इसका पाउडर और महंगा बिकता है।

बच की खेती कैसे और कहां करें

बच की खेती किसान जमीन में कर सकते हैं। जहां ज्यादा नमी रहती है, पानी ज्यादा रहता है, जैसे धान के खेत होते हैं, वहां पर बच की खेती कर सकते हैं। बच की खेती के लिए जड़ों का इस्तेमाल किया जाता है। जिसकी रोपाई की जाती है। बच की खेती के लिए चिकनी दोमट मिट्टी अच्छी होती है, नम मिट्टी इसके लिए बढ़िया मानी जाती है। इसके कंद को बीज के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।

जिसे घुड़बच के नाम से जाना जाता है। अगर आपके आसपास दलदली जगह है, तालाब है, पानी भरा हुआ क्षेत्र है, तो वहां पर भी इसकी खेती कर सकते हैं। जहां पर सामान्य फसले नहीं उगाई जा सकती है।

बच की फसल कितने दिन में तैयार होती है

बच की खेती में लगने वाले समय की बात करें तो 8 से 10 महीने के फसल को तैयार होने में लग जाते हैं। यह एक लंबी अवधि की फसल मानी जाती है। जिसमें जड़ को निकालते समय देखे की पत्तियां पीली पड़कर सूख रही है या नहीं। उसके बाद जड़ को निकाला जाता है।

बच की खेती कब की जाती है

बच की खेती के समय की बात की जाए तो बरसात के समय मतलब की जून से जुलाई के बीच इसकी खेती किसान करते हैं। फरवरी मार्च में इसे काटा जाता है। तब तक तैयार हो जाती है।

बच की बिक्री कहां करें किसान

खेती तो कर लेंगे लेकिन बिक्री कहां पर होगी यह ज्यादा जरूरी होता है। अगर भाव नहीं मिला तो किसान का समय भी बर्बाद होता है, और मेहनत भी। जिसमें बता दे कि बच को आयुर्वेदिक कंपनियां खरीदती हैं, जो कि सीधे भी किसान से ले लेती है। यह बिचौलियों के माध्यम से खरीदा जाता है। बच की खरीदी डाबर, बैद्यनाथ, हिमालय, पतंजलि जैसी कंपनियां लेती हैं।

जो थोक जड़ी बूटी व्यापारी होते हैं वह भी खरीदते हैं। जैसे कि स्थानीय और मंडी थोक के व्यापारिक आयुर्वेदिक दवा बनाने वाली दुकान है, पंसारी की दुकान के यहां भी बच के जड़ों को खरीद लेते हैं।

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