अश्वगंधा की खेती में किसानों को मुनाफा है, आइये इस लेख के द्वारा जानते हैं अश्वगंधा की खेती कैसे करें, कितना खर्चा आएगा, कितनी कमाई होगी।
अश्वगंधा क्या है
अश्वगंधा का इस्तेमाल आयुर्वेदिक दवा बनाने में किया जाता है। अश्वगंधा की खेती कई देशों में होती है। भारत के कई राज्यों में अश्वगंधा लगाया जाता है। अश्वगंधा की जड़ों में कई ऐसे तत्व होते हैं जो कि उसे अनमोल बना देते हैं। अश्वगंधा एक प्रमुख औषधीय फसल मानी जाती है जिसकी जड़ों का इस्तेमाल तनाव, कमजोरी को दूर करने के लिए किया जाता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में इसकी दवा मदद करती है, अश्वगंधा की खेती में किसान लाखो रुपए कमा सकते हैं। पारंपरिक फसलों की तुलना में यह फसल किसानों के लिए ज्यादा मुनाफा देती है।
अगर किसानों को पानी की समस्या आती है तो इसकी खेती कर सकते हैं। क्योंकि इसे बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती। कम पानी में यह फसल तैयार हो जाती है। शरीर को ऊर्जा देने वाली अश्वगंधा अब किसानों की तिजोरी भरेगी, आइये जानते हैं कैसे।
अश्वगंधा की खेती में कमाई
अश्वगंधा की खेती से होने वाले मुनाफे की बात करें तो किसानों को 28 से ₹35000 क्विंटल तक इसके जड़ का भाव मिल जाता है। यानी की अच्छी कीमतों पर इसकी जड़ बिक जाती है। जिसमें एक एकड़ से 1 से 2 लाख रु का शुद्ध मुनाफा इस फसल से ले सकते हैं। क्योंकि कीमत पर निर्भर करता है। जैसी कीमत वैसी आमदनी।
अश्वगंधा की खेती में खर्चा
अश्वगंधा की खेती कम लागत में किसानों को ज्यादा मुनाफा देती है। अगर किसान कम खर्चे में ज्यादा कमाई करना चाहते हैं तो अश्वगंधा लगा सकते हैं। यह खर्च इस पर भी निर्भर करता है कि किसान के पास खेती के साधन कैसे हैं, खेत की तैयारी के लिए उनके पास कृषि यंत्र है तो मजबूरी और अन्य लागत घट जाती है। बीज खाद और जुताई में एक बीघा में ₹5000 तक का खर्चा आता है, वही एक एकड़ में 15-20000 का खर्चा आता है।
अश्वगंधा की फसल से कितना उत्पादन मिलता है
अश्वगंधा की फसल से मिलने वाले उत्पादन की बात की जाए तो यह खेत पर भी निर्भर करता है, खेत की मिट्टी कैसी है, जलवायु कैसा है, किस तरीके से किसान खेती कर रहे हैं, कितनी मेहनत कर रहे हैं, जिसमें 1 एकड़ में 3 से 5 क्विंटल तक सूखी जड़ मिल जाती है। 50 से 75 किलो तक बीज मिल जाता है और अगर सही तरीके से किसान खेती करते हैं तो 6 क्विंटल तक उत्पादन भी मिल सकता है। इस तरह किसान कैसे देखभाल करते हैं, यह भी उत्पादन बढ़ाने और घटाने का कारण बनता है।
अश्वगंधा की खेती का समय क्या है
अश्वगंधा की खेती किसान रबी सीजन में कर रहे हैं तो अक्टूबर से नवंबर के बीच करते हैं। बरसात में जून से जुलाई के बीच में लगाया जाता है। जिसमें बरसात का समय अच्छा होता है, सही तरीके से पौधे तैयार हो जाते हैं।
अश्वगंधा की एक खेती कैसे करें
अश्वगंधा की खेती के लिए रेतीली दोमट, हल्की लाल मिट्टी बढ़िया मानी जाती है। साथ ही जल निकासी का ध्यान रखें। खेत में पानी रुकना नहीं चाहिए। क्योंकि इस फसल को कम पानी की भी जरूरत पड़ती है। खेत की तैयारी करते समय दो से तीन बार गहरी जुताई करें, जमीन को समतल बनाकर मिट्टी में खेती करें जिससे जड़ों का विकास भी अच्छे से होता है बीच की बुआ ए करने से पहले बी का उपचार कर ले तो बेहतर होगा वह रोग बीमारी से बची रहेगी वह भाई 1 से 3 सेंटीमीटर की गहराई में लाइन में करें दो लाइन के बीच की दूरी 20 से 25 सेंटीमीटर और दो पौधों के बीच की दूरी 8 से 10 सेंटीमीटर रखने से तुरई के समय भी मदद मिलती है
अश्वगंधा की फसल कितने दिन में तैयार होती है
अश्वगंधा के फसल 4 से 5 महीने में तैयार होती है मतलब की 150 से 180 दिन के बीच में यह तैयार हो जाती है। पारंपरिक फसलों के जैसे ही इसमें भी समय लगता है। लेकिन इसका भाव अच्छा मिलता है। आईए जानते हैं बिक्री कहां कर सकते हैं।
अश्वगंधा की बिक्री कहां करें किसान
अश्वगंधा की खेती बस करने में मुनाफा नहीं है बल्कि आपको बढ़िया मंडी में मिलनी चाहिए, जहां पर आप इसकी बिक्री कर सके और अच्छा भाव प्राप्त कर सके तो औषधि मंडी में अश्वगंधा की बिक्री की जाती है जैसे की मध्य प्रदेश में नीमच मंदसौर में औषधि मंडी है और राजस्थान के नागौर उदयपुर, उत्तर प्रदेश के मेरठ, पंजाब के अमृतसर लुधियाना में है, इसकी बिक्री कर सकते हैं। इसके अलावा कांट्रैक्ट फार्मिंग कर सकते हैं। ऑर्गेनिक इंडिया, हिमालय नेचुरल रेमेडीज जैसी कंपनी से किसान जुड़कर अश्वगंधा की खेती करके सीधे उन्हें बेंच सकते हैं।
अश्वगंधा को बेचने से पहले किसान जड़ को अच्छे से धूप में सुखाते हैं, जड़ों को बढ़िया धूप दिखाने के बाद ही उसकी बिक्री करते हैं। किसान चाहे तो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी अश्वगंधा की बिक्री कर सकते हैं। कई जड़ी बूटी के व्यापारी भी इसे खरीदते हैं।
यह भी पढ़े- तुलसी की खेती किसानों की तिजोरी भर देगी, जानिए तुलसी की खेती की संपूर्ण जानकारी











