UP के किसानों को अब खेतों में हाई टेंशन बिजली लाइन और ट्रांसमिशन टावर लगाने पर पहले से दोगुना से ज्यादा मुआवजा अब मिलेगा।
किसान के खेत से बिजली टावर गुजरने पर मुआवजा
किसान के खेत से अगर बिजली टावर गुजरते हैं तो किसानों को उसका मुआवजा दिया जाता है। जिसमें इस समय देश के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नियम है। जिसमें उत्तर प्रदेश राज्य की बात की जाए तो अभी तक 85 फीसदी के आसपास मुआवजा किसानों को मिल रहा था। लेकिन सरकार ने किसानों की मांग को देखते हुए इसमें बढ़ोतरी की कर दी है। दरअसल किसानों का कहना था कि जितना मुआवजा उन्हें मिल रहा है उससे उनके नुकसान की भरपाई नहीं हो रही है।
खेत से अगर हाई टेंशन बिजली लाइन और ट्रांसमिशन टावर गुजरते हैं, तो इससे बहुत सी जमीन में खेती नहीं हो पाती है। टावर के नीचे की तथा तारों के नीचे की जमीन खेती के लिए इस्तेमाल नहीं होती। जिससे किसानों को उससे कोई भी फायदा नहीं होता और अगर उसमें खेती करते तो उत्पादन ज्यादा मिलता है। लेकिन जितना मुआवजा मिल रहा है तो वह कम है। इसलिए सरकार ने मुआवजा बढ़ा दिया है, तो आइये अब जानते हैं उत्तर प्रदेश में मुआवजा कितना मिलेगा।
UP के किसानों को टावर जमीन के लिए कितना मुआवजा मिलेगा
बता दे की मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के किसानों को पहले से अधिक मुआवजा ऐसी जमीनों का मिल रहा है। वहां के नियमों में संशोधन हो चुका है, और अब उत्तर प्रदेश के किसानों को यह फायदा मिलने वाला है। बता दे की ट्रांसमिशन टावर अगर खेत में लगते हैं, तो सरकारी सर्किट रेट के आधार पर किसानों को 200 फीसदी अब मुआवजा मिलेगा, जो की 85 से कहीं ज्यादा है।
इस तरह टावर के बेस के चारों तरफ एक-एक मीटर के ज्यादा जमीनों पर भी किसानों को मुआवजा मिलेगा। साथ ही बताया गया कि दो टावर के बीच से जो बिजली लाइन गुजरती है उसके अंदर आने वाली जमीनों पर भी किसानों को थी 30 फीसदी मुआवजा मिलेगा।
केंद्र सरकार की राइट ऑफ वेगाइडलाइंस
केंद्र सरकार द्वारा उनकी राइट ऑफ वेगाइडलाइंस को अब उत्तर प्रदेश में अपनाया जा रहा है, जो की 3 साल पहले ही जारी हुई थी। जिसमें मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली एनर्जी टास्क फोर्स इसी महीने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे सकती है, और उसके बाद प्रदेश के कैबिनेट के सामने इसे पेश किया जाएगा और अंतिम मोहर लगेगी मगर जल्दी किसानों को इस योजना का फायदा मिलेगा।








