होली पर इस साल में बिना केमिकल वाला रंग डिमांड में है, जिससे ग्रामीण महिलाएं अच्छा पैसा कमा रही है, आइये आपको बताते हैं पूरी जानकारी।
बिना केमिकल के गुलाल की डिमांड
होली के त्योहार पर गुलाल की मांग सबसे ज्यादा रहती हैं। ऐसे में बिना केमिकल वाला गुलाल भी डिमांड में रहता है। क्योंकि इससे त्वचा बाल को नुकसान नहीं होता है, और यही बिना केमिकल वाला गुलाल ग्रामीण महिलाएं और पशुपालक बनाकर अच्छा पैसा कमा रही हैं। इसे बनाने के लिए वह सस्ती चीजो का या फ्री की चीजों का इस्तेमाल करते हैं। जिससे इसमें खर्च कम आता है। लेकिन डिमांड में ज्यादा होने के कारण बढ़िया प्रोडक्ट होने के कारण कीमत ज्यादा मिल जाती है, और अच्छी कमाई हो जाती है।
उत्तर प्रदेश के कुछ जिले ऐसे हैं जहां पर ग्रामीण महिलाएं और गाय का पालन करने वाले लोग गुलाल तैयार कर रहे हैं, जो की बिना किसी केमिकल के तैयार होता है, और इसकी अच्छी कीमत भी मिल जाती है।
महिलाएं प्राकृतिक रंग कैसे बना रही हैं
महिलाएं प्राकृतिक रंग बनाने के लिए गाय के गोबर की राख का इस्तेमाल करती है, तथा गुलाब की पत्तियों का इस्तेमाल करती हैं, और चुकंदर पालक जामुन की पत्तियों का इस्तेमाल करती है। जिससे सुगंध भी आ जाती है, और नुकसान भी नहीं होता। रंग भी इससे आ जाता है, यह बिल्कुल ऑर्गेनिक गुलाल होता है, जो की इको फ्रेंडली होता है। जिसमें गाय के गोबर के राख का इस्तेमाल गुलाल को कोमल बनाने में मदद करता है। लेकिन इसके लिए पहले से अच्छे से साफ किया जाता है। जिससे कोई नुकसान नहीं होगा।
गाय के गोबर की राख में छारीय तत्व होते हैं, एल्काइन प्रॉपर्टी होती है, जिससे यह नमी को सोख लेता है, और कीटाणु इससे नहीं पनपते हैं। इसे अच्छे से साफ कर दिया जाता है। जिससे यह गुलाल में इस्तेमाल होता है।
उत्तर प्रदेश के इन जिलों में बन रहा गुलाल
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में गुलाल बन रहा है। जिसमें बुलंदशहर, मुरादाबाद, सहारनपुर, संभल, उरई, बिजनौर, मथुरा जिलों के नाम आते हैं। जहां पर महिलाएं खुद गुलाल तैयार करती है। उनके लिए रोजगार के नए अवसर खुल रहे हैं। महिला आत्मनिर्भर बन रही है। पशुपालकों को कमाई का एक नया जरिया मिल रहा है।










