प्याज भंडारण का वैज्ञानिक मॉडल कृषि विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किया गया है। जिसमें लंबे समय तक प्याज खराब नहीं होगी। आइये इसके बारे में जानें।
प्याज 5 महीने तक सुरक्षित रखने का जुगाड़
किसानों को प्याज सुरक्षित रखने के लिए ज्यादा खर्चा नहीं करना पड़ेगा। एक ऐसा मॉडल तैयार किया गया है जिससे 4 से 5 महीने तक प्याज सुरक्षित रहेगी। खराब बिल्कुल नहीं होगी। इतना ही नहीं प्याज में नमी नहीं आएगी और ना ही उसमें फफूंद लगेगा। वेंटीलेशन अच्छे से होगा और लंबे समय तक प्याज सुरक्षित रहेगी। जिससे जब अच्छी कीमत मिले तब किसान प्याज की बिक्री कर सकते हैं और लंबे समय तक उसे स्टोर कर सकते हैं। दरअसल मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में तापमान में बहुत ज्यादा फेर-बदल देखने को मिलता है।
जिससे प्याज के किसानों को भी नुकसान हो जाता है। इसीलिए अधिकारी द्वारा कमाल का मॉडल तैयार किया गया है जो कि सस्ते में किसानों की मदद करेगा तो आइये इस बारे में बताते हैं।
प्याज भंडारण का वैज्ञानिक मॉडल सस्ते में तैयार
प्याज किसानों को होने वाले नुकसान को देखते हुए बांदा कृषि विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक अमित कुमार सिंह द्वारा प्याज भंडारण का एक वैज्ञानिक मॉडल बनाया गया है जो कि गांव में जो चीज उपलब्ध रहती हैं, उन्ही को लेकर उन्होंने इस मॉडल को तैयार किया गया है। जिससे कोई भी किसान इसका फायदा उठा सकता है। उन्होंने बताया कि मॉडल को बनाने में 25 से ₹40000 का खर्चा आता है। छोटे किसान कम लागत में इसे तैयार कर सकते हैं।
इसे बनाने के लिए बांस की लकड़ी, भूसा और पन्नी इत्यादि चीजों का इस्तेमाल किया गया है, और एक जुगाड़ तैयार किया गया है। जैसा कि आप तस्वीरों में देख पा रहे हैं। इसमें हवा का संचार अच्छे से होता है। नमी बिल्कुल नहीं होती है, और सुरक्षित रखी रहती है। जिससे वह खराब नहीं होती।

स्थानीय वातावरण के अनुसार करेगा काम
प्याज रखने का यह एक पारंपरिक तरीका ही है और इसमें किसी आधुनिक चीज का इस्तेमाल नहीं किया गया है। बल्कि गांव के आसपास चीजों का इस्तेमाल किया गया है, जो की खेती किसानी करने वालों के पास आसानी से उपलब्ध होता है। अधिकारीयों का कहना है कि इससे 25 से 30% तक नुकसान नहीं होगा। इतनी किसान बचत कर सकते हैं। इससे लंबे समय तक प्याज का भंडारण कर सकते हैं।
चार से पांच महीने तक फसल खराब नहीं होगी। इससे प्रतिकूल परिस्थितियों में फसल बची रहेगी। इसको उत्तर प्रदेश के वातावरण के अनुसार डिजाइन किया गया है, जो कि दूसरे किसान अपने जगह पर बना सकते हैं।
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