गर्मी के लिए फसल की तलाश कर रहे हैं, तो ये 3 फसल मिट्टी को उपजाऊ बनाएंगी और कमाई अलग से देंगी, आइये जानें फरवरी-मार्च के लिए पारंपरिक फसल।
फरवरी-मार्च के लिए पारंपरिक फसल
नमस्कार किसान भाइयों, इस लेख में हम फरवरी मार्च में खेती के लिए तीन पारंपरिक फसलों की जानकारी लेकर आए हैं। दरअसल, कुछ किसानों को पारंपरिक फसलों पर भरोसा होता है। जिसमें वह एक बार बुवाई करके और एक बार कटाई कर लेते हैं। उसमें किसानों को कोई झंझट भी नहीं करनी पड़ती, और ना ही ज्यादा इसमें खर्च भी करना पड़ता है। यहां पर जिन तीन फसलों की जानकारी देने जा रहे हैं उन्हें खेत में लगाने से मिट्टी भी उपजाऊ होती है।
यानी की दूसरी फसल जब लगाएंगे आगे चलकर तो उससे पैदावार ज्यादा मिल जाएगी। जिसमें आइये आपको नीचे लिखे तीन बिंदुओं के आधार पर तीनों फसलों की जानकारी देते हैं।
मूंग की खेती
मूंग की खेती करके किसान 2 महीने में 50 से 60000 रुपए का मुनाफा ले सकते हैं, और मूंग की खेती करने से मिट्टी भी उपजाऊ हो जाती है। मूंग की खेती के लिए जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी अच्छी मानी जाती है। गर्म जलवायु इसके लिए उपयुक्त है, इसलिए इस समय मूंग की खेती कर सकते हैं।
तिल की खेती
फरवरी-मार्च में तिल की खेती एक शानदार विकल्प माना जाता है। अगर आपके पास पानी की सुविधा है, तीन सिंचाई आप कर सकते हैं तो तिल की खेती कर सकते है। ग्रीष्मकालीन तिल की खेती में ज्यादा पैदावार मिलता है, जबकि बरसात में इससे कम मिलेगा। 8 से 10000 रुपए बीज के भाव में मिल जाते हैं। जिससे अच्छी कमाई हो सकती है। यह फसल 90 दिन में तैयार हो जाती है, और इसमें रोग कीट कम लगता है।
उड़द की खेती
इस समय किसान उड़द की खेती कर सकते हैं। 60 से 70 दिन में तैयार हो जाती है, और अच्छा मुनाफा देती है। मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मदद करती है। 12 से 15 क्विंटल एक हेक्टर से किसान इससे उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। यह अतिरिक्त आय का एक अच्छा साधन है। कम सिंचाई में यह फसल तैयार हो जाती है। इसकी खेती के लिए बलुई दोमट या हल्की रेतीली मिट्टी अच्छी मानी जाती है।
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