किसान ने मटके में लौकी की खेती का एक ऐसा नवाचार निकला है, जिस देश के साथ विदेश में भी इसकी चर्चा हो रही है, तो आईए जानते हैं कैसे।
मटके में लौकी की खेती से किसान को क्या फायदा है
खेती में किसान कई तरह के जुगाड़ करते रहते हैं। जिससे उन्हें फायदा होता है। जिसमें आज बात कर रहे हैं फिरोजाबाद के एक किसान लोकेश कुमार की जो की मटका विधि से लौकी की खेती करते हैं। वह कहते हैं की खेती में वह तरह-तरह के नवाचार लाते रहते हैं। जिनमें से कुछ फायदेमंद साबित होते हैं और कुछ नहीं। जिसमें उन्होंने बताया कि मटका विधि से लौकी की खेती में उन्हें बहुत फायदा है। चाहे बारिश ज्यादा हो या कम दोनों में ही किसानों को अच्छा उत्पादन मिलता है, और इसमें खर्च कम आता है।
जिसमें वह कहते हैं की लौकी की खेती में शुरुआत का डेढ़ महीना उन्हें किसी तरह का खर्चा नहीं करना पड़ता, खरपतवार निकालने या खेत की तैयारी करने में। वह कहते हैं कि मटका में वह लौकी लगाते हैं जिससे पैदावार ज्यादा मिलती है, और फलों की गुणवत्ता भी अच्छी होती है, तो आईए जानते हैं वह कैसे मटके में खेती करते हैं।
मटके में लौकी की खेती कैसे करें
मटके में लौकी की खेती करना आसान है। मटके में लौकी की खेती करने के लिए वह मटके में कई छेंद करते हैं। करीब 9 छेंद वह मटके में कर लेते हैं, और उसके बाद उसमें वह कई तरह की खाद मिलाते हैं जैसे कि वर्मी कंपोस्ट, एनपीके का मिश्रण, बायोफर्टिलाइजर, कंसोर्टिया ब्यूवेरिया बासियाना इत्यादि और वह दो लौकी के बीज डाल देते हैं, और फिर उन्हें क्यारी में रख देते हैं। समय-समय पर इसमें पानी देते हैं।
एक डेढ़ महीने बाद गड्ढा खोदकर स्थापित कर देते हैं। जिसमें तीन बाय तीन मीटर की दूरी में गड्ढे बनाकर इन मटकों को रखते हैं। वह कहते हैं की जमीन में जितनी लौकी से उत्पादन नहीं मिलता उतना मटके में लगाई गई लौकी से उन्हें उत्पादन मिलता है। जिससे इसमें लाभ है।
मटका में लौकी की खेती से कमाई
वह कहते हैं कि जब से उन्होंने मटके में लौकी की खेती करना शुरू किया है तो लौकी का दाम भी अधिक मिल रहा है। इस बार उन्हें 20 से ₹25 प्रति किलो लौकी के भाव मिले हैं। जिससे एक एकड़ से उन्हें ₹200000 से ज्यादा की कमाई हुई है। वह खेतों में बस मटके में लौकी लगाते हैं और उन्हें लकड़ी की मदद से सपोर्ट देते हैं। जिससे अच्छा उत्पादन मिलता है।
खेती का उनका अनोखा जुगाड़ देश के साथ-साथ विदेश में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने बताया कि उनका यह जुगाड़ देखने के लिए उत्तर प्रदेश के अधिकारी और लंदन के शोधार्थी भी आए थे, और वहां पर इस विधि से लौकी की खेती की चर्चा की जाएगी।











