लौकी की बढ़िया वैरायटी की तलाश में है तो यहां बताते हैं कौन सी लौकी लगाने पर 8 फीट तक लंबी मिलेगी और लौकी की खेती में उत्पादन 450 क्विंटल तक।
लौकी की वैरायटी
लौकी की सही वैरायटी का चयन करना बहुत ज्यादा जरूरत होता है। लौकी बाजार में हमेशा डिमांड में रहने वाली सब्जी है, सेहत के लिए भी फायदेमंद होती है, लेकिन अच्छी कीमत लेने के लिए लौकी की गुणवत्ता भी बढ़िया होनी चाहिए। लौकी देखने में बढ़िया लगनी चाहिए। लौकी लंबी होनी चाहिए। जिससे ग्राहक भी उसकी तरफ आकर्षित होंगे। इसके अलावा लौकी की खेती में ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए सही वैरायटी का चयन भी करना चाहिए। जिससे ज्यादा उत्पादन मिलता हो तो आइये आपको बताते हैं कौन सी वेराइटी 450 क्विंटल तक पैदावार दे सकती है।
लौकी की आर्का बहार वैरायटी
लौकी की किसान आर्का बहार वैरायटी लगा सकते है। इससे उन्हें अच्छा उत्पादन मिलता है। यह किसानों का खर्चा भी बचाती है। यह किस्म दो महीने में तैयार हो जाती है। इससे किसानों को प्रति हेक्टेयर 400 से 450 क्विंटल तक उत्पादन मिल जाता है, और इसके फलों का वजन 1 किलो तक होता है। इसकी खासियत है कि इसमें पुष्पसड़न रोग नहीं लगता है, इसके प्रति प्रतिरोधी है और देखने में इसका रंग हरा ही रहता है और चमकदार दिखाई देती है।
इसको साल में दो बार किसान लगा सकते हैं। वसंत और खरीफ सीजन में लगा सकते हैं। करीब 2 महीने में यह वैरायटी तैयार हो जाती है। यह किसानों को ज्यादा उत्पादन देने वाली वैरायटी है।
लौकी की नरेंद्र शिवानी वैरायटी
अगर किसानों को लंबी होने वाली लौकी की वैरायटी लगानी है तो नरेंद्र शिवानी वैरायटी लगा सकते हैं, जो की मंगलायतन विश्वविद्यालय अलीगढ़ के द्वारा विकसित की गई है। यह 8 फीट तक लंबी हो सकती है। यह भी 2 महीने में तैयार हो जाती है। इसको किसान लगाते है तो 300 क्विंटल तक एक हेक्टेयर से उत्पादन ले सकते हैं। लंबी वैरायटी के लिए यह प्रसिद्ध मनी जाती है।
लौकी की खेती कैसे करें तो ज्यादा पैदावार मिले
लौकी की फसल से ज्यादा पैदावार लेने के लिए किसानों को खेत की गहरी जुताई करनी चाहिए। करीब 2 से 3 बार और खेत में जैविक खाद मिलानी चाहिए। आप गोबर की पुरानी खाद 20-25 टन एक हेक्टेयर में मिला सकते हैं और बीज का पहले उपचार कर सकते हैं। बीजों को बोने से पहले उन्हें एक दिन पानी में भिगोकर रखें। जिससे अंकुरण अच्छे से होगा। मंडप बनाकर इसकी खेती करें ताकि फलों को सपोर्ट मिले।
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