GPS का खेती में योगदान बढ़ता जा रहा है। जिसमें बिना ड्राइवर के मतलब की ट्रैक्टर खुद से चलेगा, स्टीयरिंग पड़कर बैठने की जरूरत नहीं होगी तो।
GPS का खेती में योगदान
GPS के बारे में कुछ लोग इतना जानते हैं कि जीपीएस की मदद से लोकेशन का पता चलता है। मोबाइल फोन के द्वारा हम जीपीएस की मदद से मैप देख पाते हैं। अगर कहीं जाना है तो रास्ता जान पाते हैं। मगर बता दे की जीपीएस की मदद से खेती में कई बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। जीपीएस से खेत में जुताई का काम भी किया जा रहा है। जिसमें ट्रैक्टर को चलाने के लिए ड्राइवर की जरूरत नहीं पड़ती। जिसमें समय लागत मेहनत की बचत होती है, और सही तरीके से खेत की जुताई हो पाती है।
जीपीएस को ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम कहा जाता है जो कि उपग्रह से संकेत लेकर जमीन पर मौजूद मशीनों को लोकेशन देता है। जिससे ट्रैक्टर, सीडर, हार्वेस्टर, स्प्रे मशीन को जीपीएस से जोड़कर चलाया जा सकता है। जिससे किसान को पता चलता है कि खेत में किस लाइन में जुताई हुई है, बुवाई कहां करनी है, खाद कब कितनी डाली है, जरूरत से ज्यादा खाद नहीं डालते, एक बार जहां पर बढ़िया से जुताई हो जाती है तो बार-बार एक ही जगह पर जुताई नहीं होती है तो इसका खर्चा भी बच जाता है।
GPS से बचेगा किसान का पैसा
जीपीएस सिस्टम का किसान खेती में इस्तेमाल करेंगे तो उनके पैसों की भी बचत होगी। दरअसल बहुत ज्यादा खाद या बीज एक ही जगह पर नहीं गिरेगा। खेत में एक समान रूप से जुताई, बुवाई और पानी जाएगा। जिससे हर तरह से बचत होगी और मजदूरी का खर्चा भी घटेगा। डीजल की खपत में कम होती है। क्योंकि ट्रैक्टर अनावश्यक खेत में नहीं घूमेगा।
बिना ड्राइवर के चलेगा ट्रैक्टर
किसान कई तरह के आधुनिक कृषि यंत्रों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी तरह अब ग्लोबल नेवीगेशन सैटेलाइट सिस्टम (जीएनएसएस) वाले ऑटो -स्टीयरिंग सिस्टम पर आधारित ट्रैक्टर आ रहे है। अब नए जमाने में ऑटोनॉमस से स्वचालित रोबोटिक ट्रैक्टर और स्मार्ट ट्रैक्टर आर टी के जीपीएस रियल टाइम किनेमैटिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। भारत में पॉवरट्रैक यूरो 30 जैसे ट्रैक्टर और उन्नत महिंद्रा मॉडल में जीपीएस सिस्टम दिया जा रहा है जो की सही तरीके से जुताई करते हैं।
इसमें 0.05 मीटर से कम की त्रुटि होती है। यह ट्रैक्टर बिना ड्राइवर के सीधे खेत में जोताई और बुवाई का काम कर सकते हैं. यह ट्रैक्टर सीधी रेखा में खेत में जुताई करते हैं। फसल को बोने और छिड़काव करने के लिए जीपीएस का इस्तेमाल किया जाता है। इससे ईंधन और श्रम की बचत होती है। फार्मट्रेक 60 एपी जैसे ट्रैक्टरों में सिम्हा किट (Simha Kit) और जीपीएस तकनीक लगा सकते हैं किसान।











