MP के किसानों के लिए राहत भरी खबर सुनने को मिल रही है, जिसमें भू अर्जन मॉडल में बदलाव हो सकता है, आईए जानते हैं पूरा मामला क्या है।
सरकारी परियोजना में किसान की जमीन आने पर मुआवजा
विभिन्न प्रकार की सरकारी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए कभी-कभी किसानों की जमीन भी ले जाती है। अगर उस प्रोजेक्ट के अंदर किसान की जमीन आती है तो फिर किसान को उसे सरकार को देना पड़ता है। जिसमें भू अर्जन मॉडल के तहत किसानों को मुआवजा भी दिया जाता है। लेकिन किसानों का कहना है कि मुआवजा कम मिलता है। अन्य राज्यों में ज्यादा मुआवजा मिलता है, और पहले की तरह अब किसानों को कुछ फायदे भी नहीं मिलते हैं।
किसानों का कहना है कि भू अर्जन की नीति सही नहीं है। जिसमें यह जानकारी अब मिल रही है कि सरकार नई भू अर्जन मॉडल पर बड़ा फैसला लेने की तैयारी कर रही है। जिससे किसानों को आप पहले से अधिक फायदा होगा। अब किसानों को महाराष्ट्र, हरियाणा जैसे अन्य राज्यों की तरह मुआवजा मिलेगा। क्योंकि अभी जो भी मुआवजा मिलता है वह बाजार मूल्य से कम है। जिससे किसान परेशान है इसलिए उनका कहना है कम दाम में जमीन नहीं बेंच सकते।
भू अर्जन मॉडल पर चर्चा
किसानों की समस्या को देखते हुए भू अर्जन मॉडल पर चर्चा की गई है। मंत्री राकेश सिंह की अध्यक्षता में प्रदेश स्तरीय समिति ने मंत्रालय में किसान संगठन और उनके प्रतिनिधियों के साथ बैठक की है। जिसमें कई तरह के सुझाव भी लिए गए हैं, और जो भी इस मॉडल में कमी है उन पर चर्चा की गई है। जिसमें मुआवजा की राशि पर भी बात हुई है, तो आइये जानते हैं किन-किन कामों पर बातचीत की गई है और क्या मांग रखी गई है।
किसानों को जमीन के बदले मिले सरकारी नौकरी
इसे बैठक में यह भी मांग रखी गई कि पहले की तरह ही सरकारी नौकरी मिले। दरअसल उनका कहना है कि अगर उनकी जमीन ली जाती है तो परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। इसके अलावा यह मांग रखी गई की जमीन के बदले उन्हें जमीन दी जाए। कुछ लोगों का कहना था कि अगर सरकारी परियोजनाओं के लिए किसी किसान परिवार के पहले ही जमीन ली जा चुकी है तो फिर दोबारा से जमीन लेते समय उनसे बात की जाए, उनकी आर्थिक सामाजिक स्थिति का आकलन किया जाए।
सरकारी गाइडलाइन की भी बात की गई, कहा गया कि सरकारी गाइडलाइन के द्वारा जो दिया जाता है, जो कि कम है, जमीनों को लेने के बाद बाजार मूल्य के अनुसार मुआवजा देना चाहिए। क्योंकि अभी जो मुआवजा दिया जाता है वह बाजार मूल्य का आधा भी नहीं रहता।
यह भी पढ़े-किसानों को बांस के पौधे लगाने पर 60 हजार रु दे रही सरकार, बंजर जमीन में हरा सोना है यह फसल











