दूध का कारोबार आसमान छूएगा, इन 2 नस्लों की भैंस का करें पालन, जानिए भैंस खरीदते समय धोखा से कैसे बचे

On: January 18, 2026 6:29 PM
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दूध का कारोबार

दूध का कारोबार करना चाहते हैं तो बढ़िया नस्ल की भैंस का चुनाव करना चाहिए तो आईए जानें भैंस के दो उन्नत नस्लों के बारे में और भैस खरीदते वक्त क्या ध्यान रखें।

दूध का कारोबार के लिए उन्नत नस्ल की भैंस का पालन

दूध उत्पादन के लिए भैंस पालन सही विकल्प माना जाता है। क्योंकि भैंस ज्यादा मात्रा में दूध देती हैं। लेकिन अगर बढ़िया नस्ल की भैंस नहीं खरीदते हैं या भैंस खरीदते समय धोखा खा जाते हैं तो ऐसे में नुकसान हो सकता है। इसलिये दूध का कारोबार करने के लिए उन्नत नस्ल की भैंसों का पालन करना चाहिए। जिसमें उत्तर प्रदेश के पशुपालन विभाग से दो बढ़िया नस्ल की भैंसों की जानकारी दी गई है, जो ज्यादा मात्रा में दूध देती है।

  • सबसे पहले तो मुर्रा नस्ल की भैंस की बात करेंगे जो की बहुत ज्यादा अच्छी होती है। मुर्रा नस्ल की भैंस सामान्य तौर पर 10 से 18 लीटर तक दूध दे सकती है। लेकिन अगर उनकी बढ़िया से देखभाल की जाए और सही आहार दिया जाए तो 20 से 30 लीटर या उससे ज्यादा भी दूध दे सकती हैं। मुर्रा नस्ल की भैंस जितनी काली होती है उतनी ही ज्यादा बढ़िया मानी जाती हैं। इनके सींघ छोटे और सिर की तरफ घूमते हुए दिखाई देते हैं।
  • भदावरी नस्ल की भैंस भी बढ़िया होती है। इनके सींघ लंबे होते हैं, और मोटे होते हैं, और यह बाहर की तरफ मुड़े होते हैं। अगर किसानों के पास चारे की सुविधा कम है तो भदावरी नस्ल की भैंस ऐसी होती है जो कम चारे में भी ज्यादा दूध देती है। भदावरी नस्ल की भैंस सामान्य तौर पर 5 से 8 लीटर दूध 1 दिन में देती है। अगर बढ़िया देखभाल की जाए तो 10 लीटर से ज्यादा भी से दूध लिया जा सकता है।

भैंस खरीदते सही भैंस कैसे चुने

भैंस महंगी आती है, इसलिए इनको खरीदते समय कई बातों का ध्यान रखना जरूरी हो जाता है। नहीं तो धोखा खा सकते हैं। जिसमें एक्सपर्ट बताते हैं कि जब भैंस को देखने जाए तो उसके सामने खड़े हो और उसके चेहरे को निहारे उसके मुंह का आकार वी सेप का हो तो बढ़िया माना जाता है और उसकी आंखें साफ होनी चाहिए, आंखों में चमक होनी चाहिए, जिससे पता चलता है कि उसकी सेहत दुरुस्त है। दुधारू पशु की चमड़ी भी चिकनी और चमकदार होती है।

साथ ही थन को जरुर देखना चाहिए। थन में कोई घाव तो नहीं है। थन नीचे की ओर लटके होने चाहिए और थन चारों बराबर होने चाहिए। अगर थन आसमान तरीके से लटकते हैं तो फिर आगे चलकर दूध निकालने में दिक्कत हो सकती है। भैंस की गर्दन को निहारना चाहिए। वह मजबूत होनी चाहिए। भैंस की छाती चौड़ी होनी चाहिए। उसे चला फिराकर भी देखना चाहिए। अगर उसकी चाल में फुर्ती नजर आती है तो वह स्वस्थ है, अगर सुस्ती के साथ वह चल रही है तो कमजोर हो सकती है।

भैंस खरीदते समय भैंस पालक से उसके टीकाकरण का रिकॉर्ड भी पूछना चाहिए कि उसे कितने टीके लगे हैं। किस तरीके से उसका पालन किया जाता है। भैंस से अच्छा दूध उत्पादन लेने के लिए उसे साफ पानी देना चाहिए और मौसम के अनुसार उसकी देखभाल करनी चाहिए।

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